Wallpaper With Shayari | प्यार की शायरी | दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी | Download

 Wallpaper With Shayari|प्यार की शायरी|दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी |Download




लिख तो दे हम आपकी तारीफ़ मैं कुछ अल्फाज़
शायद फिर कही चांद की कदर कम ना हो जाए

ख़्वाब  हर  रात  तेरे  ही  आते  रहे।
और  दिल  तुम  हमारा जलाते रहे।।

रूबरू  यार  दीदार मुश्किल न कर।
हर  तरह  से  तुम्हें  हम  मनाते  रहे।।

ये  रिवायत  मुहब्बत की होती नहीं।
क्यों सितम इस तरह आप ढाते रहे।।

wallpaper with shayari download


Wallpaper With Shayari Download हम  जफ़ाओं

हम  जफ़ाओं को भी तेरे देखे नहीं।
हाँ  भले  आप  नश्तर  चुभाते  रहे।।

है  तग़ाफ़ुल  भी  तेरा  ग़वारा  हमें।
हम  मुहब्बत  कीं रस्में निभाते रहे।।

प्यार की प्यास हर दिन बढ़ी जाए है।
तिश्नगी   आँसुओं  से  बुझाते  रहे।।

तेरी  मर्ज़ी  है  चाहो  न चाहो हमें।
हम मुक़द्दर को बस आज़माते रहे।।

प्यार करके"बिसरिया"नहीं भूलता।
पर  ज़माने  से  इसको छुपाते रहे।।

Wallpaper With Shayari  | प्यार की शायरी | दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी | Download


Wallpaper Download Shayari Wale तेरी मासूम 

तेरी मासूम आँखों में शरारत अच्छी लगती है
मेरी दुख्तर मुझे तेरी हर आदत अच्छी लगती है...

ख़ुदा ने बख़्शी जो मुझको ये नेमत अच्छी लगती है
बना हूँ बाप बेटी का ये अज़मत अच्छी लगती है...

जो सर से पाँव तक है वो नज़ाक़त अच्छी लगती है
परी जैसी जो पाई है वो ज़ीनत अच्छी लगती है...

हमल में माँ के जब तू थी तसव्वुर तब भी करता था
मगर अब गोद में आकर हक़ीक़त अच्छी लगती है...

नहीं मिलता है इक पल भी तेरे बिन चैन अब मुझको
अब आठों पहर ही तेरी ये क़ुर्बत अच्छी लगती है...

तुझे देखूँ शफ़क़्क़त से तो ज़िंदा होती इक सुन्नत
ख़ुदा को बाप की तेरे शफ़क़्क़त अच्छी लगती है...


Wallpaper Hd Download Shayari 2021 तेरे आने

तेरे आने से मैरे घर में जैसे इक बहार आई
ये चारो सिम्त बिखरी जो मुसर्रत अच्छी लगती है...

तुझे चूमूँ तो कुछ एहसास होता है रूहानी सा
बयाँ मैं कर नहीं सकता वो लज़्ज़त अच्छी लगती है...

मेरा चेहरा जो छूती है तू अपने नर्म हाथो से
तेरी नाज़ुक हथेली की नज़ाक़त अच्छी लगती है...

शुरू होकर तुझी पे ख़त्म होती है मेरी दुनिया
अगर है ये कोई वहशत तो वहशत अच्छी लगती है...

कुशादा हो गया आने से तेरे रिज़्क़ मेरा भी
तेरी क़िस्मत से रोज़ी की इज़ाफ़त अच्छी लगती है...

ज़रा सी फ़िक्रे फ़र्दा भी मुझे अब आ गई शायद
तेरी ख़ातिर हर इक शय में क़नाअत अच्छी लगती है...


Download Shayari Photo ये मालो ज़र भला
ये मालो ज़र भला क्या चीज़ है मैं जान भी दे दूँ
मैं जब पूरी करूँ तेरी ज़रूरत अच्छी लगती है...

तू सबसे छोटी है फिर भी तू ही मलिका मेरे घर की
रियाया हम तेरी हमको हुकूमत अच्छी लगती है...

तुझे ख़ामोश देखूँ तो लगे है बोझ सा दिल पे
अगर तू चहचहाए तो तबीअत अच्छी लगती है...

वो मेरी ही किसी इक बात पे नाराज़ हो जाना
फिर आकर मुझसे मेरी ही शिकायत अच्छी लगती है...

है मेरी ज़िन्दगी में क्या तेरी क़ीमत ये मैं जानू
तू बस अनमोल है मुझको ये क़ीमत अच्छी लगती है...

मैं सारा दर्द अपना भूल जाता हूँ तेरे ख़ातिर
पसीना जब बहाता हूँ मुशक़्क़त अच्छी लगती है...

लगाकर जब तुझे कंधे सुलाता हूँ मैं रातों को
तो अगली सुब्ह तक तेरी हरारत अच्छी लगती है...

ख़ता पे मेरी जुर्माना लगाती है तू जब झट से
तो पल में फैसला देती अदालत अच्छी लगती है...

Download Shayari Images ख़ता
Wallpaper  Shayari  | प्यार की शायरी | दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी | Download

जिरह करती है जब मेरी तरफदारी में अम्मी से
तो सारे घर को तेरी वो वकालत अच्छी लगती है...

तू अपनी दादी अम्मी का जब अक्सर सर दबाती है
तो उनके अश्क़ कहते हैं के ख़िदमत अच्छी लगती है...

तेरे दादा फिर वो भी बिठाकर शानों पे
कहते के रिफ़अत अच्छी लगती है...

मुसीबत तुझको कहती हैं कभी जब लाड में नानी
तो अगले पल ही कहती हैं मुसीबत अच्छी लगती है...

रुलाकर एक दिन मुझको पराये घर तू जायेगी
अमीन आख़िर मैं हूँ तेरा अमानत अच्छी लगती है...

तुझे मैं दूर ख़ुद से ज़िन्दगी भर कर नहीं सकता
मगर ये सच है बेटी जब हो रुख़सत अच्छी लगती है...

कभी भी फ़र्क़ बेटे में न बेटी में किया "बिस्मिल"
मुझे पुरखो की अपने ये रवायत अच्छी लगती है...!!!

एक ग़ज़ल उन लोगो को समर्पित जिनको ईश्वर ने बेटी जैसी आलिशान नेअमत से नवाज़ा है.


Download Shayari Wallpaper अपनी   हम   
अपनी   हम   बेबसी   से  डरते  हैं।
दिल  की  इस  बेक़ली  से डरते हैं।।

राज़  दिल  के  कहीं न खुल जायें।
पी   तो   लें   बेख़ुदी   से  डरते  हैं।।

आसमाँ क्या ज़मीं भी अपनी नहीं।
साँस  है   ज़िन्दगी   से   डरते   हैं।।

है नसीबों का कज मगर फिर भी।---ऐब
अपनी  हम  इस कमी से डरते हैं।।

जान  दुनिया  न  ले ग़में-उल्फ़त।
आँख  की  हम  नमी  से डरते हैं।।

हार   बाज़ी   गये   मुहब्बत  की।
अपनी इस मुफ़लिसी से डरते हैं।।

चाँद   तारों   से  दोस्ती  कर  ली।
फिर  भी हम चाँदनी से डरते हैं।।

क्या "बिसरिया"करे कोई कह दे।
हम  तो  अपनी ख़ुदी से डरते हैं।।